<p>तुम्हारे साथ रहकर<br>
अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है<br>
कि दिशाएँ पास आ गयी हैं,<br>
हर रास्ता छोटा हो गया है,<br>
दुनिया सिमटकर<br>
एक आँगन-सी बन गयी है<br>
जो खचाखच भरा है,<br>
कहीं भी एकान्त नहीं<br>
न बाहर, न भीतर।<br>
<br>
हर चीज़ का आकार घट गया है,<br>
पेड़ इतने छोटे हो गये हैं<br>
कि मैं उनके शीश पर हाथ रख<br>
आशीष दे सकता हूँ,<br>
आकाश छाती से टकराता है,<br>
मैं जब चाहूँ बादलों में मुँह छिपा सकता हूँ।<br>
<br>
तुम्हारे साथ रहकर<br>
अक्सर मुझे महसूस हुआ है<br>
कि हर बात का एक मतलब होता है,<br>
यहाँ तक कि घास के हिलने का भी,<br>
हवा का खिड़की से आने का,<br>
और धूप का दीवार पर<br>
चढ़कर चले जाने का।<br>
<br>
तुम्हारे साथ रहकर<br>
अक्सर मुझे लगा है<br>
कि हम असमर्थताओं से नहीं<br>
सम्भावनाओं से घिरे हैं,<br>
हर दिवार में द्वार बन सकता है<br>
और हर द्वार से पूरा का पूरा<br>
पहाड़ गुज़र सकता है।<br>
<br>
शक्ति अगर सीमित है<br>
तो हर चीज़ अशक्त भी है,<br>
भुजाएँ अगर छोटी हैं,<br>
तो सागर भी सिमटा हुआ है,<br>
सामर्थ्य केवल इच्छा का दूसरा नाम है,<br>
जीवन और मृत्यु के बीच जो भूमि है<br>
वह नियति की नहीं मेरी है।</p>

Adbi Sama

Abhinesh Rajoria

Tumhare Sath Rehkar by Sarveshwar Dayal Saxsena

DEC 15, 20201 MIN
Adbi Sama

Tumhare Sath Rehkar by Sarveshwar Dayal Saxsena

DEC 15, 20201 MIN

Description

<p>तुम्हारे साथ रहकर<br> अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है<br> कि दिशाएँ पास आ गयी हैं,<br> हर रास्ता छोटा हो गया है,<br> दुनिया सिमटकर<br> एक आँगन-सी बन गयी है<br> जो खचाखच भरा है,<br> कहीं भी एकान्त नहीं<br> न बाहर, न भीतर।<br> <br> हर चीज़ का आकार घट गया है,<br> पेड़ इतने छोटे हो गये हैं<br> कि मैं उनके शीश पर हाथ रख<br> आशीष दे सकता हूँ,<br> आकाश छाती से टकराता है,<br> मैं जब चाहूँ बादलों में मुँह छिपा सकता हूँ।<br> <br> तुम्हारे साथ रहकर<br> अक्सर मुझे महसूस हुआ है<br> कि हर बात का एक मतलब होता है,<br> यहाँ तक कि घास के हिलने का भी,<br> हवा का खिड़की से आने का,<br> और धूप का दीवार पर<br> चढ़कर चले जाने का।<br> <br> तुम्हारे साथ रहकर<br> अक्सर मुझे लगा है<br> कि हम असमर्थताओं से नहीं<br> सम्भावनाओं से घिरे हैं,<br> हर दिवार में द्वार बन सकता है<br> और हर द्वार से पूरा का पूरा<br> पहाड़ गुज़र सकता है।<br> <br> शक्ति अगर सीमित है<br> तो हर चीज़ अशक्त भी है,<br> भुजाएँ अगर छोटी हैं,<br> तो सागर भी सिमटा हुआ है,<br> सामर्थ्य केवल इच्छा का दूसरा नाम है,<br> जीवन और मृत्यु के बीच जो भूमि है<br> वह नियति की नहीं मेरी है।</p>