Atharvashirsha Meaning Hindi (भाग 5)

AUG 30, 20222 MIN

Description

श्लोक 9 एकदन्तञ् चतुर्हस्तम्, पाशमङ्कुशधारिणम् । रदञ् च वरदम् हस्तैर्बिभ्राणम्, मूषकध्वजम् । रक्तं लम्बोदरं, शूर्पकर्णकम् रक्तवाससम् । रक्तगन्धानुलिप्ताङ्गम्, रक्तपुष्पैःसुपूजितम् । भक्तानुकम्पिनन् देवञ्, जगत्कारणमच्युतम् । आविर्भूतञ् च सृष्ट्यादौ, प्रकृतेः पुरुषात्परम् । एवन् ध्यायति यो नित्यं स योगी योगिनां वरः || अर्थात :-  भगवान गणेश एकदन्त चार भुजाओं वाले हैं जिसमे वह पाश,अंकुश, दन्त, वर मुद्रा रखते हैं | उनके ध्वज पर मूषक हैं | यह लाल वस्त्र धारी हैं | चन्दन का लेप लगा हैं | लाल पुष्प धारण करते हैं | सभी की मनोकामना पूरी करने वाले जगत में सभी जगह व्याप्त हैं | श्रृष्टि के रचियता हैं | जो इनका ध्यान सच्चे ह्रदय से करे वो महा योगि हैं | श्लोक 10 नमो व्रातपतये, नमो गणपतये, नमः प्रमथपतये, नमस्ते अस्तु लम्बोदराय एकदन्ताय, विघ्ननाशिने शिवसुताय, वरदमूर्तये नमः || अर्थात :– व्रातपति, गणपति को प्रणाम, प्रथम पति को प्रणाम, एकदंत को प्रणाम, विध्नविनाशक, लम्बोदर, शिवतनय श्री वरद मूर्ती को प्रणाम | Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices