Atharvashirsha Meaning Hindi (भाग 6)

AUG 30, 20223 MIN

Description

श्लोक 11 एतदथर्वशीर्षं योऽधीते । स ब्रह्मभूयाय कल्पते । स सर्वविघ्नैर्न बाध्यते । स सर्वतः सुखमेधते । स पञ्चमहापापात् प्रमुच्यते । सायमधीयानो दिवसकृतम् पापन् नाशयति । प्रातरधीयानो रात्रिकृतम् पापन् नाशयति । सायम् प्रातः प्रयुञ्जानोऽअपापो भवति । सर्वत्राधीयानोऽपविघ्नो भवति । धर्मार्थकाममोक्षञ् च विन्दति । इदम् अथर्वशीर्षम् अशिष्याय न देयम् । यो यदि मोहाद्दास्यति स पापीयान् भवति । सहस्रावर्तनात् । यं यङ् काममधीते तन् तमनेन साधयेत् ।। अर्थात :-  इस अथर्वशीष का पाठ करता हैं वह विघ्नों से दूर होता हैं | वह सदैव ही सुखी हो जाता हैं वह पंच महा पाप से दूर हो जाता हैं | सन्ध्या में पाठ करने से दिन के दोष दूर होते हैं | प्रातः पाठ करने से रात्रि के दोष दूर होते हैं |हमेशा पाठ करने वाला दोष रहित हो जाता हैं और साथ ही धर्म, अर्थ, काम एवम मोक्ष पर विजयी बनता हैं | इसका 1 हजार बार पाठ करने से उपासक सिद्धि प्राप्त कर योगि बनेगा | श्लोक 12 अनेन गणपतिमभिषिञ्चति । स वाग्मी भवति । चतुथ्र्यामनश्नन् जपति स विद्यावान् भवति । इत्यथर्वणवाक्यम् । ब्रह्माद्यावरणम् विद्यात् । न बिभेति कदाचनेति ।। अर्थात :- जो इस मन्त्र के उच्चारण के साथ गणेश जी का अभिषेक करता हैं उसकी वाणी उसकी दास हो जाती हैं | जो चतुर्थी के दिन उपवास कर जप करता हैं विद्वान बनता हैं | जो ब्रह्मादि आवरण को जानता है वह भय मुक्त होता हैं | Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices