Atharvashirsha Meaning Hindi (भाग 8)

AUG 30, 20221 MIN

Description

श्लोक 14 अष्टौ ब्राह्मणान् सम्यग्ग्राहयित्वा, सूर्यवर्चस्वी भवति । सूर्यग्रहे महानद्याम् प्रतिमासन्निधौ वा जप्त्वा, सिद्धमन्त्रो भवति । महाविघ्नात् प्रमुच्यते । महादोषात् प्रमुच्यते । महापापात् प्रमुच्यते । स सर्वविद् भवति, स सर्वविद् भवति । य एवम् वेद ।। अर्थात :- जो आठ ब्राह्मणों को उपनिषद का ज्ञाता बनाता हैं वे सूर्य के सामान तेजस्वी होते हैं | सूर्य ग्रहण के समय नदी तट पर अथवा अपने इष्ट के समीप इस उपनिषद का पाठ करे तो सिद्धी प्राप्त होती हैं | जिससे जीवन की रूकावटे दूर होती हैं पाप कटते हैं वह विद्वान हो जाता हैं यह ऐसे ब्रह्म विद्या हैं | Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices