माँ स्कंदमाता

SEP 26, 20269 MIN

Description

नवरात्रि के पाँचवें दिन पूजी जाती हैं माँ स्कंदमाता, जो अपने पुत्र स्कंद (कार्तिकेय) को गोद में लिए विराजती हैं। वे सिर्फ़ माता का वात्सल्य ही नहीं, बल्कि देवताओं की सेना को दिशा देने वाली शक्ति भी हैं। यह कहानी है तारकासुर नामक राक्षस की, जिसे केवल भगवान शिव के पुत्र ही पराजित कर सकते थे। माता पार्वती की तपस्या और शिवजी से विवाह के बाद, एक प्रचंड ऊर्जा से जन्म हुआ उनके पुत्र स्कंद का। माँ गंगा और कृतिकाओं के संरक्षण में उनका पालन हुआ और आगे चलकर वही देवसेना के सेनापति बने, जिन्होंने तारकासुर का वध किया। कमल पर विराजमान माँ स्कंदमाता को पद्मासना देवी भी कहा जाता है। उनका स्वभाव कोमल और करुणामयी है। मान्यता है कि उनकी आराधना से संतान सुख प्राप्त होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। तो जानिए कैसे माँ स्कंदमाता ने अपने पुत्र को देवसेना का नायक बनाया, और क्यों उनकी पूजा से भक्त को मिलता है मातृत्व का स्नेह और आशीर्वाद। Visit our website: https://chimesradio.com